Sunday, 19 October 2025

अयोध्या उदास है

राम मंदिर का फैसला आने से पहले 2019 में हमने एक रचना लिखी थी-------

(अयोध्या उदास है)

इस दिवाली भी---
सरयू उदास है,अयोध्या उदास है
हमारी आस्था टेंट मे है, 
उफ! मेरे अंतस मे केवट,
और हे! राम कह रहा--
जटायु उदास है.

रामभक्ति में-----
तमाम शबरी की आँख पथरा रही,
वे देखो----
मंदिर के लिये तराशी गई,
लंबे समय से रखी,
किसी अहिल्या सी,
राम मंदिर की––
शीला उदास है.

ये वनवास----
उन्हीं की नगरी में उफ!
हम नपुंसक है,
शायद इसी से-----
हनुमान, लक्ष्मण,सीता ही नही,
बल्कि अपने राम के वात्सल्य की,
मां--
कौशल्या उदास है.

इस दिवाली भी---
सरयू उदास है,अयोध्या उदास है.

रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
7800824758

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