Tuesday, 26 May 2020

कविता---(मेरे शहर मे बरसात हो रही है )

(मेरे शहर में बरसात हो रही है)
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।
दिवाने हो गये है सारे स्याह बादल,
भूल गये है ये कुछ और शहर है,
जहां इनको बरसना है!
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।
कही तेरी खातिर यही न ठहर जायें,
भेज दे इन्हे ये बस तेरी सुनेंगे,
ये कैदी हो गये है------------
तब से तेरी रुप के,
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।

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