(इश्क़ करके)
ना पढ़ सकी कोई किताब मै इश्क़ करके,
मै औरत सुफि हो गई इश्क़ करके।
मौलाना और तकरीरे मस्जिद-------
तुम्हे मुबारक!
मै खुद हो गई----------------
मुकम्मल मुसलमान इश्क़ करके।
ये हिज़ाब,ये परदे,ये चारदीवारी
कैद है औरत की,
तुम क्या निकालोगे इस कैद से मुझको,
मै खुद ही छोड़े जा रही,
अपने जिस्म का मकान-------
ऐ,रंग--------------इश्क़ करके।
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