इस कोरोना वायरस के लॉकडाउन में--"मेरी पत्नी का मेकप बॉक्स रेड जोन में आ गया है. उसकी सुंदरता को निखारने वाले सारे प्रोडक्ट एक-एक कर कोरोना पाजीटिव होते जा रहे हैं". उसका उतरा हुआ मुँह अब तलक कोरोना के तमाम उतार-चढ़ाव को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त है.
मैंने तो दो दिन से टीवी पर कोरोना से संबंधित समाचार ही देखना बंद कर दिया है.क्योंकि मुझे अच्छे से याद है, जब मेरी पत्नी का मेकअप बॉक्स--"मेकअप के सामानों से भरा था, तो वे ग्रीन जोन की तरह खुश थी.कुछ खाली हुआ तो वे ऑरेंज जोन की तरह खुश थी". यहां तलक तो गनीमत थी, लेकिन जैसे ही मेरी पत्नी की--"खूबसूरती को निखारने वाली तमाम प्रोडक्ट खत्म हुए तो उसका मेकअप बॉक्स रेड जोन में आ गया".
जिसके चलते आज मेरी पत्नी ना ढंग से मेकअप कर पाने के क्वॉरेंटाइन के दर्द से गुजर रही है. उसके मेकप की इस कोरोना वायरस जैसी बिपत्ती का असर अब उसके मन मस्तिष्क और हाव-भाव में भी पड़ने लगा है. वे पहले की तरह आईने के सामने खड़ी होकर अपने होठों को कुछ यू इधर-उधर करती है जैसे वे लिपस्टिक लगाने के बाद अक्सर किया करती थी, लेकिन आज जैसे ही उसने अपने होठों को इधर-उधर किया, तो उसकी दोनों मासूम आँखों में आँसू भर आये.उफ! हे !भगवान काश मेरी पत्नी अपने--"मेकअप बॉक्स के इस रेड जोन से निकलकर पुनः अपनी सुंदरता के ग्रीन जोन में आ जाए".
मैंने अपनी पत्नी की सुंदरता व उसके मेकअप की कभी भी इतनी गिरी हुई इम्यूनिटी नहीं देखी. मुझे जहां तक याद है वे यह है कि किसी भी पत्नी के--"मेकप की गिरी हुई इम्यूनिटी को बढ़ा सकें, ऐसी कोई दवा दुनिया में बनी ही नहीं". लेकिन मैं अपनी पत्नी के इस घटते हुए मेकअप के इम्यूनिटी कॉल में भी लगातार एक "पति रूपी कोरोना वारियर्स की तरह लगा हुआ हूं. निश्चित है कि हम बहुत जल्द अपनी पत्नी को उसकी मेकअप के रेड जोन से निकाल कर ग्रीन जोन मे ला पाएंगे".
यह व्यंग्य मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.
लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no.7800824758
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