Sunday, 14 June 2020

लेख---(तलाक )

(तलाक)
कभी-कभी जब किसी मासूम तलाकशुदा खातून को अपने सीने से लगाये हुये अपनी मासूम सी बच्ची के साथ किसी टेलीविजन के तलाक वाले कार्यक्रम में रोता हुआ देखता हूं,तो लगता है जैसे इस खूबसूरत से मज़हब को कुछ जेहन से बीमार मौलवियो ने इसे कहां से कहां पहुँचा दिया,आज एैसे ही चंद नामाकुलो के नाते---इस्लाम और कुरान की आयत भी अपनी ही अमीना की आँखो में उस आँसू को तकने को बाध्य है अर्थात इस्लाम आज मजलूम औरत की आँख का वे आँसू बन गया है जिसका कतरा कुरान की आयत के उस सीने पे गीर रहा है जिसे हर मुसलमान अपना दीन और इमान मानता है।
तलाक महज एक शब्द भर नही बल्कि एक औरत का इस्लाम की आड़ मे किया गया वे कत्ल है जिसकी सदा इस मरदे मजहब ने कभी अपनी चाहरदिवारी के बाहर नही आने दिया।
उफ!औरत को कितना लिजलिज़ा और कमजोर कर दिया है कुछ लोगो ने कि पुछिये मत----"जिस औरत को उसकी चाहत और मोहब्बत का ईद मिलना था उसे इन चंद इबलिसे मौलवियो ने जबरदस्ती इस्लाम और हदिस का नाम लेकर एक हँसती खेलती औरत की जिंदगी मे तलाक लाकर उसे ताउम्र के लिये न खत्म होने वाले आँसू और गम के मोहर्रम से जोड़ दिया"।
आज तलाक के खिलाफ उठ रही तमाम आवाज़ो से इन लोगो की वे दरो-दिवार व बुनियादे कांपने लगी है सिकन से वे चेहरे तमतमा गये है लेकिन अब शायद ये बगावत न थमेगी आज औरत के वही तमाम दर्द बारुद बन गये है मेरा दावा है कि ये उठा हुआ इंकलाब हमारे हिन्दुस्तान की मुस्लिम औरतो के हक और हुकूक की नज़ीर बनेगा,और फिर बेज़ा तलाक दे रहे हर शौहर की रुह कांप जायेगी।
अब इनके पाक कानो को नमाज़ सुनाई देगी,कुरान की आयत सुनाई देगी लेकिन तलाक और हलाला के वे शरियती फरमान न सुनाई देगे ये बागी इंकलाब ऐसी नीच जहनियत को अपने बदलाव की उस सैलाबे दरिया मे बहा ले जायेगे जिसके बाद मुकद्दस इस्लाम होगा।
औरत के अच्छे दिन आयेगे,इस्लाम के अच्छे दिन आयेंगे,न कत्ल होगा किसी वालिद और अम्मी के दिये हुये उस मेहर का जिसे वे ताजिंदगी अपने शौहर व उसके परिवार के सुपूर्द करती है-------या अल्लाह जल्द मयस्सर हो उन्हें वे कानून जो इस मुल्क मे हर औरत को मयस्सर है यानिं कानून के अच्छे दिन।
@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उ.प्र.)
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर और निर्मेश के त्यागी भईया मेरे "तलाक" जैसे विषय पे लिखे संवेदनशील लेख को जो स्नेह दिया।

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