पूरे देश में कोरोना आपदा के समय सफाई कर्मियों ने जिस निष्ठा व सेवा भाव का प्रदर्शन किया वे उन्हें वंदनीय व प्रशंसनीय बनाता है. सच्चे अर्थों में वे एक सजग--"राष्ट्रभक्त सिपाही की तरह अपनी जिम्मेदारियों की सरहद पर डटे रहे". उन्हें सफलता विफलता मिलती रही समाज के तमाम तंज और झंझावात को भूल उनके अंदर एक असीम मानव प्रेम व सेवा भाव का जो इस आपदा काल में प्रादुर्भाव हुआ वैसा ना मैंने कभी पढ़ा और ना ही अपनी इन जिंदा आंखों से देखा ही.
सच तो यह है कि उस देश को कभी कोई आपदा या युद्ध परेशान या पराजित नहीं कर सकता, जिस देश का-"आखरी व्यक्ति भी अपनी संपूर्ण मानव सेवा भाव को निछावर करने को तैयार हो, वैसा ही कुछ हमारी तमाम सफाई कर्मियों ने विश्व आपदा के कालखंड में कर दिखाया है". वे किसी भी मोहल्ले. बस्ती या शहर मैं हिंदू मुसलमान सिक्ख, इसाई, बनकर अपने काम को अंजाम नहीं दिया. बल्कि उन्होंने पहले से भी कहीं ज्यादा श्रेष्ठ सेवा इस समय पूरे देश को दी. जब पूरा देश लॉक-डाउन की कैद में रहा, कोरोना वायरस की चपेट में आता रहा, ये उस विषम परिस्थिति में भी अपने सफाई करने के धेय या लक्ष्य को पूरा करते रहे.
प्रयाग या कुंभ के मेले में जब हमारे देश के प्रधानमंत्री ने इन सफाई कर्मियों का स्वयं पैर धुलकर गमछे से पोछा तो उस समय--"राजनीतिक हलके में उनका मजाक उड़ाया गया या इसको उनकी राजनीति कही गई लेकिन उन सफाई कर्मियों का पैर धुलना आज अपनी सार्थकता का प्रमाण स्वयं दे रहे हैं". वे मैले पांव है जो हमारी गलियों, शहरों को साफ व स्वच्छ कर--"हमारी और कोरोना आपदा के बीच एक दीवार की तरह खड़े हैं", जीन पैरों को उस समय प्रधानमंत्री के द्वारा धुला गया वे पैर आज जन-जन को धोना चाहिए राजनीति चाहे जितनी घृणित हो लेकिन हमारे और आपके दिल को घृणित नहीं होना चाहिए.
महात्मा गांधी ने स्वयं सफाई और सफाई कर्मियों के हक की बात करते थे. वे हर व्यक्ति को--"एक सफाई कर्मी कहते थे, इतना ही नहीं इन सफाई कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका भारत के स्वतंत्रता-संग्राम में भी थी" आज इस कोरोना महामारी में एक बार फिर सफाई कर्मियों ने अपनी सशक्त राष्ट्रभक्ति व सेवा का परिचय दिया है, हां यह भी एक सच रहा है कि चाटुकारिता पोषक लेखन ने तमाम ऐसे लोगों की-- "राष्ट्रभक्ति का पृष्ठ नष्ट कर दिया". हो सकता है कि कोरोना विपदा के बाद भी इनके इस सेवा भाव के तथ्य का भी कत्ल कर दिया जाए लेकिन हम जैसे एक आध लेखक अपनी--"श्रद्धा भाव के तिरंगे से इन्हीं कभी महरूम नहीं होने देंगे".
ऐसा नहीं कि कोरोना आपदा काल में यह सफाई कर्मी इसकी चपेट में ना आए हो, यह भी चपेट में आए इनकी भी मौतें हुई यह भी अपने परिवार को छोड़ गए. हम आप लॉक-डाउन और क्वारनटाइन रहे और यह सभी सफाई कर्मी कोरोना वायरस की परवाह किए बिना हमारी आपकी स्वच्छता को बनाए रखा आज मैं अपने इस लेख में उन तमाम--"सफाई कर्मियों की शहादत को, कोई सामान्य शहादत नहीं बल्कि सरहद के शहीद का दर्जा देता हूं और अपने शब्दों के तमाम श्रद्धा पुष्प उन्हें अर्पित करता हूं'.
यह लेख मेरा स्व-लिखित व अप्रकाशित है.
लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin. no. 222002 (U P)
Mo. no. 7800824758
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