Thursday, 23 July 2020

व्यंग्य----(राहुल गाँधी का सदन में भूकंप )

व्यंग्य----------
          (राहुल गाँधी का सदन मे भुकंप)
हालाँकि राहुल गाँधी ने ये बयान बहुत पहले से ही दे रंखा था कि--"अगर मै सदन मे इतने मिनट बोल दु तो पुरे सदन मे भुकंप आ जायेगा",और वाकई वे ऐतिहासिक कारनामा काग्रेंस के राहुल गाँधी ने कर दिखाया. भारतिय स्वतंत्रता के बाद मेरी जानकारी मे कभी भी--"इतने बड़े देश के सदन मे इतना भयंकर और भिषण भुकंप नही आया".
और भुकंप भी ऐसा आया कि--"काग्रेंस खुद अपने ही रिऐक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता का आकलन नही कर पा रही". इसके चपेट का आलम ये था कि--खुद प्रधानमंत्री मोदी इस सुंदर और कलात्मक भुकंप को काफी देर तलक समझ नही पाये और जब तलक समझ आया तब तलक--"काग्रेंस के भुकंप यानी आदरणीय राहुल गाँधी अपना काम कर चुके थे".
                         बेबाकी तो उनकी पुरे सदन मे देखते बन रही थी खुद को पप्पू तलक कहते हुये भी उनके चेहरे पे कही से भी जारा सा सिकन नही था,लेकिन अब बेचारे राहुल करते भी तो क्या? खुद अपने ही मुखारबिंद से पप्पू कह बैठे तो उस शब्द की गरिमा का भी ध्यान रखना था अतः इसी शब्द को प्रमाणित करने हेतु वे अचानक से उठे बीना किसी तरह के आव-ताव देखे--"झट प्रधानमंत्री के गले लग पड़े और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी खुद को इस अप्रत्याशित भुकंप से बचा नही पाये".
जब थोड़ा सा इस गले आ पड़े भुकंप से राहत मिली तो पुनः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने--"बड़े आदर से इस काग्रेंस के भुकंप से हाथ मिला कर जोशो-खरोश के साथ राहुल की पीठ थपथपाई".
ये भुकंप फिर बड़ी अदा से अपनी उस सीट की तरफ बढ़ा जिसपे बैठ उसने इतने बड़े सदन की गरिमा को अपनी हरकत से चार चाँद लगाया था. मैने भी जिंदगी मे पहली बार एक विपक्ष व राष्ट्रीय पार्टी के सर्वेसर्वा को इतने जाँलि मुड मे देखा सच क्या वे पल था--"कि अभी तलक वे भुकंप का झटका खुद मुझे महसूस हो रहा".
उनके वे आँख मारने की अदा ने--सदन को बेशक शर्मिंदा किया हो पर कालेज के उन छात्र व छात्राओं को जैसे--"उन्होंने रिवाइटल की गोली दे दी हो". उफ! कितना कौमार्य था उनके आँख मारने की उस अदा मे ये वे भुकंप है जिसकी चपेट मे आये व्यक्ति का जीवन धन्य होता है. राहुल गाँधी को मै प्रधानमंत्री होने की तो अभी नही पर---"हा मै विवाह के एक पहुँचे हुये नास्त्रेदमस की तरह ये भविष्यवाणी जरुर करता हूँ कि इनके मानसिक व शारिरीक भुकंप को सह पाने वाली एक अदद पत्नी की आवश्यकता है".
अब हालाँँकि राहुल गाँधी के इस भुकंप की राजनैतिक गलियारे मे लोकसभा चुनाव तक चर्चा व परिचर्चा होगी तमाम प्रिंट मिडिया और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया --"अपने-अपने टीआरपी के लिहाज से भुकंप के इस मोमोज को विथ चटनी परोसेंगे पर राहुल की मुन्नाभाई वाली झप्पी इनमे हमेशा इतर रहेगी".

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जौनपुर---222002 (उत्तर-प्रदेश).
Mo.no.---7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

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