Wednesday, 15 July 2020

कविता---(पन्द्रह अगस्त )

(पन्द्रह अगस्त)
एक माँ----------------
अपने दुध-मुँहे बच्चे का पेट भरने के लिये,
लूट के आई है अस्त-ब्यस्त,
क्या?एैसे ही देश मे-----------
हम मनाते है पन्द्रह अगस्त।
फिर रहा युवा--------------
डिग्रीयो की लाश लिये काँधो पे,
माँ बहन की आबरु चिथड़ो में लिपटी है,
बाप टी बी से खाँस रहा,
कहां है इनका वंदेमातरम,
कहां है इनका पन्द्रह अगस्त।
देश के रहनुमा वे है,
जिन्हे मादरे-तमीज़ तक नही,
फहरा के लौटे तिरंगा---------
बंद कमरे में खुली शराब की बोतल,
बगल में सोफे पे गिरी गाँधी टोपी,
अस्त-ब्यस्त खद्दर की धोती,
वाह!क्या खुब क्रांति है,
ये है वर्तमान भगत सिंह-----
और इनका है पन्द्रह अगस्त।

###पन्द्रह अगस्त के प्रकाशनार्थ पत्रिका में छपने हेतु भेजी गई एक रचना।

No comments:

Post a Comment