Sunday, 26 July 2020

कविता--(कारगिल रह गया )

(करगिल रह गया)
सरहद से नही लौटा----------
एक नई दुल्हन का वही दिल रह गया,
सीने पे थे गोलियो के निशान,
उसकी खुली आँखो मे---------
लहराता तिरंगा और करगिल रह गया।
माँ भुलती नही जार-जार रोती है,
उसे गम नही------------------
अपने एकलौते बेटे की शहादत का,
उसे गम है कि सरहद के उस तरफ,
तमाम साँप------------------
और उन साँपो का बील रह गया।
राखी के दिन बहन उसकी--------
बंद कमरे मे सुनती है राष्ट्रगान,
और फक्र करती है उस भाई पे एै,रंग----
जिसके नाते
हिंद के नक्शे में करगिल रह गया।
###करगिल के तमाम शहीदो को एक श्रद्धांजलि।

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