Friday, 16 October 2020

कविता---(रावण )

(रावण )
पुराने खल चरित्र का रावण ,
आज के माडर्न खल चरित्र के रावण से,
कही ज्यादा पवित्र व श्रेष्ठ था,
क्योंकि उस रावण पे,
आज के माडर्न रावण की तरह-----
"किसी मासूम आठ वर्ष की बच्ची के,
रेप का कोई इल्जाम न था" ।
पुराने रावण पे तो,
उस राम ने विजय पाली,
पर माडर्न रावण से,
आज के राम डर गये है,
उससे गली-गली, शहर-शहर,
बचते व छिपते फिर रहे,
और माडर्न रावण अट्हास कर रहा।
शायद ऐसा लग रहा कि जैसे,
उस महा-विद्वान पुराने रावण के----
 मारने के श्राप से राम पीड़ित हो गये है।
सच तो ये है कि आज के माडर्न रावण को जला पाना,
इस नपुंसक समाज के बस का नही,
तभी तो अब भी,
हर दशहरे मे उसी पुराने रावण को------
जलाया जा रहा।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला---जौनपुर Pin.no.222002
(उत्तर-प्रदेश)।
Mo.No.--7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

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