Rangnath Dubey's Poems
Friday, 3 June 2022
( घुँघट नही दिखता)
हा!मेरी खता है कि-
मै अब चाँद नही लिखता
पर क्या?करु ऐ,"रंग"
तरक्की के दौर मे
हमे औरत तो दिखती है--
पर उसका घुँघट नही दिखता!
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