Monday, 6 June 2022

(मूल्क के मिट्टी की)
आ गई खुशबू मेरे मूल्क के मिट्टी की,
महक उठी साँसे याद की फिर,
मुँह मे आ गया पानी------------
ले नाम माँ के चोखे और लिट्टी की।
आ गई खुशबू मेरे मूल्क के मिट्टी की।
सारी मकबूल किताबे पढ़ डाली,
पर कही इतने जिंदा हर्फ न मिले,
मैने इज्ज़त की गर कूरआन के बाद,
तो अपने मूल्क के खत और चिट्ठी की।
आ गई खुशबू मेरे मूल्क के मिट्टी की।
यु ही नही है अमी असतो मूल्क मेरा,
जितने बीमार है इस गैरे मूल्क मे,
ऐ,रंग-----उतने इलाज की तासीर है,
मेरे मूल्क के मिट्टी की।
आ गई खुशबू मेरे मूल्क के मिट्टी की।

No comments:

Post a Comment