हमारी आस्तीन में कुछ शातिर रहते है,
कही अफज़ल गुरू,कही ज़ाकिर रहते है।
अजीब हालात है साहब----------
कि हमारे मूल्क में मुसलमान की आड़ में,
कुछ काफ़िर रहते है।
हमारी आस्तीन में कुछ शातिर रहते है।
उमड़ता है जब-------------
इनकी दफ़न को हूज़ुम सड़को पर,
मेरी कलम की आयत रोती है,
कि या अल्लाह मेरे मुल्क में इतने नमक हराम--------------
इन्ही की खातिर रहते है।
हमारी आस्तीन में कुछ शातिर रहते है।
बेजा की तकरीर-ऐ-मुखालफ़त
का वक्त आ गया है,
आओ दुनिया को बता दे,
कि एै,रंग----एैसे मुसलमान
हमारी कुरआन से बाहिर रहते है।
हमारी आस्तीन में कुछ शातिर रहते है।
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