(किसान)
किसान-------------
कभी सुखा तो कभी बाढ़ मे मरता है,
सावन की अय्याशी को क्या पता?
कि किसान कैसे----------
चढ़ती आषाढ़ मे मरता है।
वे अपने बँधे मवेशियो की रखवाली करता है रातदिन,
फिर भी कोई खुशी नही आती कभी इसके पास पलछिन,
फिर भी कर्ज से खरिदे----------
जब ना मालुम सी बीमारी से मरने लगते है,
इसके एक-एक कर मवेशी------------
तो ये तील-तील कर अपने मवेशियो की बाड़ मे मरता है।
किसान----------
कभी सुखा तो कभी बाढ़ में मरता है।
इसके तलक कभी नही पहुँचती कर्ज़माफी,
इसकी बीमार फसले इसे अंदर तक तोड़ देती है,
ये असहाय हो जाते है उस बेटे से,
जैसे कुंती सी कोई माँ अंधेरे मे पैदा कर,
कही कपड़े मे लपेट छोड़ देती है,
ये कर्ण---------
अपने कुरुक्षेत्र सी खेत की दाड़ पे मरता है।
किसान--------
कभी सुखा तो कभी बाढ़ मे मरता है।
लाश ही लाश है कोई शहादत नही,
एै सियासत देख ये कभी यु.पी,कभी ऐम.पी,कभी बिहार,
तो कभी एै"रंग"---------
मोदी के गुजरात की बलसाड़ मे मरता है।
किसान--------
कभी सुखा तो कभी बाढ़ मे मरता है।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.------7800824758
किसान एक अंतहीन पीड़ा की हकीकत।
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