Friday, 27 December 2024

(सांवली)

एक रोमांटिक कविता---(सांवली मछेरन )

मै नदी के किनारे बैठा,
अपलक---
उस सांवली सी मछेरन को देख रहा था.
जो डुबते हुये सूरज की लालिमा मे
अपनी कसी हुई देहयष्टि के 
कमर तक साड़ी खोसे,
एक खम और लोच के साथ
अपनी मछली पकड़ने वाले जाल को 
खींच रही थी.
मुझे यूं लगा कि जैसे--
उसकी जाल की फंसी मछलियों मे से,
एक फंसी हुई मछली सा 
मेरा मन भी है.

वह इससें बेखबर,
एक-एक मछली निकाल--
अपने पास रखे पानी से भरे डिब्बे
मे डालती रही.
बस ! इतना उसने 
इतनी देर मे जरुर किया,
कि अपने माथे पे गिर आये,
बाल को पीछे कर
उसने कुछ और बची मछलियां,
उस डिब्बे मे रख
गीले जाल और डिब्बे को पकड़,
ज्यो घुटनों भर पानी से निकली,
तो यूं लगा कि जैसे--
वे सांवली मछेरन,
विश्व कैनवास की सबसे खूबसूरत औरत हो.

नाम---रंगनाथ द्विवेदी
ईमेल आईडी--rangnathdubey90@gmail.com
फोन और वाट्सप--7800824758

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