Friday, 27 December 2024

(पहली जनवरी हो)

( पहली जनवरी हो )

तुम मेरी पहली जनवरी हो,
मैं तुम्हे,
बहुत ही टूट कर चाहता हूं,
तुम मेरी हर पल और हर सांस की,
14 फरवरी हो.

ये तुम्हारी शर्म का,
गुलाबी आंचल
मुझे बावला सा कर देता है.
सच तुम केवल मार्च की होली ही नहीं.
बल्कि,
मेरे दिल के आम के बगीचों की 
पहली मंजरी हो.

सच तुम यूं ही सिलसिलेवार,
मेरे रोमांटिक कविता की दिसंबर हो.
तुम्हें मैंने टांग रखा है,
अपने दिल में,
और तुम हमारे उसी दिल के दीवाल की,
कभी ना उतरने वाली.
एक बेशकीमती कैलेंडर.
की पहली जनवरी हो.

रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर-(उत्तर-प्रदेश )
मोबाइल नंबर---7800824758

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