Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 3 December 2024
(मासूम लड़की)
(मासुम लड़की)
तुम जीसे कहते हो गुँगी------
वे अक्सर मेरी गज़लो मे ढ़लती है,
वे थिरकती है------
जब पाँवो में बाँध के घूँघरु,
तो कितना बोलती है,
ऐ,रंग----वे गुँगी नही-------
एक मासुम लड़की है।
विश्व विकलांग दिवस पे।
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