Friday, 17 January 2025

(पत्नी पतंजलि की मिल गई)

(मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई)
सुबह होते ही-----------
कपाल भाति और अनुलोम-विलोम कर गई,
हाय!राम---------
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।
एलोवेरा और आँवले के गुण बता रही,
मुझे तो अपने जवानी की चिंता सता रही,
हे! बाबा रामदेव----------
आपने मेरी खटिया खड़ी कर दी,
सारे रोमांस का नशा काफुर हो गया,
ससुरी पति के प्यार का आसन छोड़-----
आपके योगासन मे पिल गई।
हाय!राम-----------
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।
रोज च्यवनप्राश और दूध का सेवन,
पचासो दंड बैठक,
मै निरुपाय तक रहा उसका रुप लावण्य,
तीन दिन हो गये हाथ न लगी,
डर है कि ये दिन कही तीस न हो जाये,
उफ!ये दूरी-----------
यही सोच के मेरी बुद्धि हिल गई।
हाय!राम------------
मुझे पत्नी पतंजलि की मिल गई।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

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