Rangnath Dubey's Poems
Monday, 27 January 2025
शबरी और कुबडी में भेद नहीं है,
वाल्मीकि और रैदास
डुबकी लगा रहे
तुम भी नहा लो हमें कोई खेद नहीं है
तुम्हें चिढ़ है
क्योंकि तुम्हारे मन की कंठी
और कंठ में विश्व का कल्याण हो
का मंत्र
वेद नहीं हैं.
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