Monday, 13 January 2025

(कटाक्ष)

चुनावी कटाक्ष------शुक्रवार
(बेचैन एक शुपनखा हो गई)
जब से साथ में डिंपल और प्रियंका हो गई,
तब से और खूबसूरत-----------
ये चुनाव की लंका हो गई।
एै "रंग" साँप लोट रहा सीने पे-----
इनके मिलने से बेचैन एक शुपनखा हो गई।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान-अंकुर,निर्मेश के त्यागी भइया और धन्यवाद चुनावी कटाक्ष के उस कालम का जहाँ मुझे अनवरत प्रकाशन के साथ नित नये कटाक्ष की अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का सुअवसर मिल रहा है।

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