Saturday, 11 January 2025

(बाहों में गीत रोए)

(बाँहो मे गीत रोये)
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये,
रोये शहनाई तेरी याद की,
तो बाँसुरी भी लबो से भीग रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।
एक तरफ तेरे इंतज़ार की श़मा,
तो दुसरी तरफ विरह के दीप रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।
लौट आ ऐ,रंग----फिर से मेरी दुनिया मे,
कि तेरी प्रीत रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।

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