Tuesday, 30 September 2025

खण्डित राम

(राम एक कलाकार में खंडित हो गये)
इंतज़ार कर रही है करके मेकप,
किसी ग्राहक का!
पत्थर की नहीं------------
अपने भूखे पापी पेट की अहिल्या।
आज गुलज़ार भी तो है,
कोठे वाली गली!
क्योंकि आज------------
दशहरे के राम और रावण की झांकी निकलनी है,
उसे याद है,
कि अगले बीते वर्ष भी वे इसी तरह,
मेकप किये अपने कोठे के छज्जे पे खड़ी थी,
तो राम बने कलाकार ने किस तरह काम उन्मुक्त नजरो से,
उसके उन स्तनो को तका था!
पहली बार दशहरे की---------------
उसकी वे पिड़ा असह्य थी!
क्योंकि इस कोठे वाली अहिल्या ने,
जिस राम को अब तलक सुना था,
वे राम जैसे-------------
इस कलाकार में खुद खंडित खड़े थे।

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