ऐ कान्हा छोड़ना,गागरिया फोड़ ना
मै करती हूँ विनती,हाथो को जोड़ ना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-----
मोहे जाना है जल्दि ओ मेरे साँवरे
गर्मी की धुप है,जलता है पाँव रे
ऐसे तु ऐ कान्हा मुख अपना मोड़ ना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-----
घर आओगे मेरे तो,माखन खिलाऊँगी
चोरी से तुमको अलग से भी दुँगी
जाऊ मै घर को,ऐ कान्हा बोलना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-------
फुटी जो गागरियाँ,डाटेगी मईया
मै कैसे सुनुगी रे हाय!मेरी दईया
अब तो तरस खाओ,यशुमति के भईया
अब कुछ भी ना सोचना।
ऐ कान्हा छोड़ ना।
आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई।
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