मुझे उस समय जिस तरह के शक्ल सूरत की लड़कियां पसंद थी उसमें से एक भी गुण मेरी कॉलोनी की सुनैना में नहीं थे, अब उस समय चाहे तो आप मेरी उम्र को भी एक दोष या कमी में शामिल कर सकते हैं.खैर सुनैना कुछ दूर के रिश्ते में भी थी इस लिए ना चाहकर भी कभी कभी थोड़ी बहुत व्यावहारिक बातचीत उससे कर लेनी पड़ती थी. अब मुझे तो नहीं पता पर हा मेरी उतनी बातचीत से भी जैसे सुनैना के चेहरे पर एक खुशी थोड़ी देर के लिए ही सही पर आ जाती थी लेकिन मैं उस खुशी को समझ नहीं पाता था.
वैसे मेरे घर में ले देकर तीन लोग ही थे मां पापा और मैं बाकी बड़ी दीदी थी लेकिन उनका ब्याह शादी हो गया था वह अपने बाल बच्चों और परिवार में खुश थी
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