Wednesday, 10 December 2025

पगली बना दो

(पगली बना दो)

नन्हे-नन्हे पाँव,
छोटी-छोटी अँगूली बना दो,
ऐ,खुदा--
मुझे फिर से वही
बचपन की तितली बना दो.

मै तैरु गाँव के पोखर,
और तोडू बाग से अंम्बिया,
मुझे अम्मी की डाँट,
और अपने अब्बू के दुलार की 
वही फिर से पगली बना दो.

यह मेरी स्वरचित रचना हैं.

रंगनाथ द्विवेदी,,,
जौनपुर, उत्तर-प्रदेश

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