Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 10 December 2025
फेंकी गई सीता
(फेकी गयी सीता)
रावण के यहाँ-
कितनी सुरक्षित थी सीता।
यहाँ लक्ष्मण के हाथो पुरी रात,
नोची-खसोटी गयी सीता।
ऐ रंग-
कैसा बदलाव है देखो,
कि बलात्कार करके-
राम के पिछवारे फेकी गयी सीता।
दिल्ली में हुऐ बलात्कार पर।
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