सुना है कि
प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में
विलुप्त हुए,गिद्ध आ रहें हैं.
लेकिन राजनीतिक गिद्ध
अभी भी अयोध्या आने से कतरा रहे हैं
देखना यह सभी गिद्ध
चुनाव हार जाएंगे
क्योंकि यह सिर्फ
कुछ जातियों की डाल पर
मंडरा रहें हैं
इन सभी के राजनीतिक
पंख जल जाएंगे
तब देखना
हे राम हे राम कहते हुए
यह गिद्ध भी
अयोध्या आएंगे.
लेकिन तब तलक समय का जटायू
अपने राम का हो चुका होगा
बस यह सरयू को देखेंगे
और इसके पानी को
खून से लाल करने का पश्चाताप करेंगे.
और दिल्ली
के कुछ राजनीतिक गिद्ध
राम को काल्पनिक कह
अपनें अयोध्या ना आ पाने
की पीड़ा से
हे राम हे राम का विलाप कर
अपने मन के पश्चाताप की अयोध्या में
एक असह्य पीड़ा से
तड़ पड़ाएंगे.
क्योंकि
अब उनके अवरोधों के राम का
राजनीतिक रावण परास्त हुआ
और वह टेंट के लंबे वनवास से
निकल,
एक बार फिर
अपनी अयोध्या आ रहें हैं.
"इस रचना का आशय किसी को आहत या पीड़ा पहुंचाना नहीं है बस यह प्रभु श्री राम के प्रति मेरी स्वयं की अभिव्यक्ति है"
यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर (U P).
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