Rangnath Dubey's Poems
Friday, 19 December 2025
(सिद्धांत सारे खोखले निकले)
(सिध्दांत सारे खोखले नीकले)
कैसे नयी पौध,नयी कोपले नीकले
मेरे अपने ही आस-पास कुछ दोगले नीकले।
क्या खुब सियासत है हँसते शख्श की,
ऐ ,रंग-
सिध्दांत बडे ऊँचे पर खोखले नीकले।
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