Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 27 December 2025
(देवता हो जाऊंगा)
(देवता हो जाऊगाँ)
चंद होठों तक सिमट के,दास्ताँ हो जाऊगाँ।
आदमी रहने दे,खुद लापता हो जाऊगाँ।
न छेड ऐ दुनियाँ तु मेरे दिल के अहम को,
ऐ,रंग-
गर ठेस लगी दिल को,
तो देवता हो जाऊगाँ।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment