(पुजारी आ गये)
कुछ पंडे कुछ पुजारी आ गये,
चुनाव लड़ने कुछ मौलाना कुछ बुखारी आ गये।
ठाकुर साहब टहलते रहे,
उन्ही के विधानसभा से तिवारी आ गये,
कुछ पंडे कुछ पुजारी आ गये।
वे नारी भरे मंच से ललकारती रही,
उससे लड़ने पुरुष नही,
लखनऊ से एक ब्रह्मचारी आ गये,
कुछ पंड़े कुछ पुजारी आ गये।
बिकास,नौकरी,बिजली वादो की झड़ी,
स्वर्ग बना देंगे!
ऐ,रंग----------इस प्रदेश मे फिर
कुछ महिनो के चमत्कारी आ गये,
कुछ पंड़े कुछ पुजारी आ गये।
###चुनावी चक्कलस।
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