Tuesday, 8 June 2021

(आज रात)
ऐ बेवफ़ा सामने बैठ और सभल आज रात,
मै पढुँगी तेरे शहर में गज़ल आज रात।
लब पे हँसी होगी दिल में आँसू ,
रोशनी लुटाऊँगी-----------------
मै चराग की तरह जल आज रात।
तड़प उठेगी चाँदनी मेरी सदा से,
पछतायेगी वे भी निकल आज रात।
मै ये मुशायरा छोड़ जाऊँगी,
उस बेवफ़ा के दिल में--------
ऐ,रंग----रह जायेगी एक कसक आज रात।

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