Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 24 June 2021
(भूख ने अपना बदन बेचा है)
स्याह अँधेरी रात में सन्नाटे को चीरती,,,,,
पुल के उस तरफ की चीख,,,,,,,,,,,,,
उफ!शायद ऐ,रंग----फिर भूख ने किसी को----------------
अपना बदन बेचा है।
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