Sunday, 10 April 2022

(नकाब देखा था)
वे नायिका विलुप्त हो गई इस सदी में,
जिसके लरज़ते हुये होंठो पे-------
कभी कवियो ने तील का दाग देखा था।
वे घुँघट का सौंदर्य कही खो गया,
जिसमें कभी कवि ने----------
अपनी कविताओ का चाँद देखा था।
अब तो तोड़ देती है वे दिल बे-मुरौवत,
ऐ,रंग---कभी शायरो ने
जिस लड़की में शीरी का अक्स़------
और फरहाद की मोहब्बत का नकाब देखा था।

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