Sunday, 10 April 2022

(याद तुम्हारी नही गई)
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई,
वे पिंक से सूट मे तुम्हे देखना,
जैसे अभी कल की बात हो,
तुम गई तो बेशक---------
पर मेरी जेहन में ज्यो की त्यो तुम आज भी हो,
तुम्हारी कसम मौसम बदले,साल बदला
लेकिन तुम्हें चाहते रहने कि--------
मेरी खुमारी नही गई,
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई।
वे पतझड़ की हवा,
और उनकी शाखो से गिरते पत्ते,
और तुम्हारे कालेज से छुटने का वे वक़्त,
जब तुम्हारे खुले बाल,
हवाओ से इधर-उधर बिखर जाते थे,
फिर उन्हे तुम अपनी नाज़ुक अँगुलियो से,
जब पिछे की तरफ करती थी,
वे मेरा तुम्हे देखने का खूबसूरत लम्हा था,
मै आज भी उसी लम्हें से मोहब्बत करता हूँ,
सच तो ये है कि----------
बिना तुम्हारी याद के हमसे,
कोई दिन या रात गुजारी नही गई!
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर निर्मेश के त्यागी भईया जो आपने आज के काव्य-संग्रह के कालम मे"याद तुम्हारी नही गई" को अपना स्नेह देने के लिये।

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