Wednesday, 13 April 2022

1-----ठाकुर का कुँआ
गर अंबेड़कर न होते-------
तो चढ़ नही पाते तुम मंदिर की सिढ़ियाँ,,,,,,,
पीने नही देता तुम्हे पानी,ऐ-रंग------
आज भी ठाकुर का कुँआ।
            2----बुधुवा की लुगाई
दलित को ऐहसास अपनी ईज्ज़त का हुआ,
अब चीखती नही किसी भी कोठरी से----
ऐ-रंग----बुधुवा की लुगाई।

अंबेड़कर जयंती पर विशेष।

No comments:

Post a Comment