Sunday, 26 February 2023

(खूबसुरत औरत नही देखी)
माथे पे चुह-चुहाता पसीना,
कमर पे खुशी साड़ी!
और सर पे सीमेंट की भदेली,
श्रम की मादक चाल!
ऐ,रंग---मेरी कविता ने कभी-------
इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।

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