Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 18 February 2023
(तेरे रुप की मदिरा)
तेरे रुप की मदिरा-----
मै बैठ के पीता रहा,अपनी आँख के चुल्लु से।
तेरे रुप की मदिरा-----
पढ़ने लगा कशीदा,ज्यो-ज्यो नशा हुआ,
ऐ,रंग--दिल शायर था,शब्द थे चीखने मे।
तेरे रुप की मदिरा----
मै बैठ के पीता रहा,अपनी आँख के चुल्लु से।
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