Rangnath Dubey's Poems
Monday, 27 February 2023
(फटे दुपट्टे को रोज सिलती है)
जहां से रईस की बिटियाँ ने हटा रंखा है---
दुपट्टा अपना!
ऐ,रंग----वही पे गरीब की बिटियाँ,
बदन ढ़कने के लिये-----------
अपने फटे दुपट्टे को रोज सिलती है।
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