Rangnath Dubey's Poems
Monday, 6 February 2023
(फरेबी मुस्कूराहट)
मै जब तलक कैद था,
उसके रुप के पिंजड़े में।
ऐ,रंग----वे रोज डालती थी----
मेरी चाहत के बरतन मे अपनी फरेबी मुस्कूराहट।
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