Rangnath Dubey's Poems
Monday, 3 November 2025
(गांव के दिन)
(गाँव के दिन)
यादो मे है,-
मेरे गाँव के दिन।
वे अल-सुबह किसानो का,
अपनी खेतो की तरफ जाना
क्या खुब थे?
वे उनके हल-बैल के दिन।
ऐ रंग,-साँसो मे
मिट्टी की सोंधी गंध,
वे मीठी नींद
और खपरैल के दिन।
यादो मे है,-
गाँव के दिन।
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