Saturday, 29 November 2025

नंगे शरीर की रिश्वत

(नंगे शरीर की रिश्वत)
कालेधन का तो नहीं पता लेकिन,
कल एक मज़लूम औरत---------
सरकारी अस्पताल में अपने बीमार पती का इलाज कराने गई,
तो उसे डाॅक्टर व स्टाप ने नीचे से उपर तलक देखा,
शायद ये उम्मीद थी कि कुछ लाई होगी देगी,
लेकिन ये भापते ही--------------
कि वे कुछ दे नही पायेगी,
सभी उसे दुत्कारने लगे!
तभी उसने सबसे बड़े डाॅक्टर का पाँव पकड़,
गिड़गिड़ाई कि साहब ये मर जायेंगे,
उस नकली सहानुभूति के मसीहा ने कहा ठिक है,
अच्छा ये बताओ क्या तुम अपने पती के इलाज के नाम पे हमें कुछ दे सकती हो,
ये कहते समय डाॅक्टर की नज़र उस महिला की घबराहट में फिसले हुये आँचल,
के बीच ब्लाउज़ में कसे हुये उन्नत उरोज पर थी,
अचानक से उसने स्त्रीयोचित लज्जा से अपना आँचल झेप अपने सीने पे रखा,
लेकिन क्या करती----------
तब तलक एक अघोषित पिड़ा के लिये उस डाॅक्टर ने एक अश्लील थपकी दे,
ये कह की अगर पती की जान बचानी हो तो तुम समझ रही हो न,
डाॅक्टर अपने कामन रुम के दरवाजे की तरफ जा उसे जानबुझकर अधखुला छोड़ शायद अपने होठ पे सिगरेट सुलगा अपने शरीर की सुलगन को---------
सिगरेट बुझाने वाले मर्तबान में बिल्कुल सिगरेट के बचे भाग को-------
बुरी तरह मसल कर बुझाने की तरह ही अपनी कामुकता का सिगरेट भी उस अंग-विशेष में मसलकर बुझाने की खातिर उसने,
जिस दरवाजे को अधखुला छोड़ा है,
आज उस तरफ पती के जीवन के लिये सिटकनी चढ़नी है------------
सिटकनी चढ़ी और डाॅक्टर उस तरफ उसके शरीर से अपनी रिश्वत लेता रहा,
वे ज्यो रिश्वत दे बाहर आई----------
तो देखा की बड़ी तेजी से उसके पती का इलाज चालु था।
वे अपने शरीर की रिश्वत को अब तलक टटोल रही थी,
वे डाॅक्टर अब भी अपनी कनखियो से तक रहा था,
उसे लगा कि जैसे वे थूक लगा अब भी उसके शरीर के उन अंगो से चिपके कुछ फस गये नोटो की तरह,
दो-तीन मर्तबा रगड़ अपनी रिश्वत गिन रहा हो।

@@@रिश्वत की एक भयावह तस्बीर।

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

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