Sunday, 9 November 2025

(साहित्य आज तक)

ना ब्लाउज,ना बटन,ना काज तक 
वाह रे! “साहित्य आज तक".
हिंदी के छ्न्द,उर्दू के‌ मिसरे
फट गए
खोले बैठी है सारे अंग, 
अब नई कविता 
लिखी जाएगी 
बिस्तर की सिलवट 
नायिका के चरम सुख 
और सहवास तक 
वाह रे! “साहित्य आज तक.”

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

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