Rangnath Dubey's Poems
Monday, 3 November 2025
(मुमताज़ की आँखें)
(मुमताज की आंखें )
है सबसे खूबसूरत
मेरी मुमताज की आंखें,
कितनी कशिश
कितना नशा लिए है,
मेरी मुमताज की आँखें.
कभी यहां उठे,
कभी वहां उठे,
है कैमरे से कहीं अच्छी,
ऐ "रंग"---
मेरी मुमताज की आँखे.
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