Monday, 3 November 2025

(मुमताज़ की आँखें)

(मुमताज की आंखें )

है सबसे खूबसूरत
मेरी मुमताज की आंखें,

कितनी कशिश 
कितना नशा लिए है,
मेरी मुमताज की आँखें.

कभी यहां उठे, 
कभी वहां उठे,
है कैमरे से कहीं अच्छी,
ऐ "रंग"---
मेरी मुमताज की आँखे.

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