Friday, 28 November 2025

( मौत की सुरंग से निकले हैं)

(मौत की सुरंग से निकले हैं)

हम जिंदगी की जद्दोजहद
और जंग से निकले हैं
सांस आई गई,कमजोर हुई
लेकिन टूटी नहीं .
हमे उम्मीद थी जीने की 
और,जीतने की.
इसीलिए तो हम 
एक नए जीवन की 
गर्भ से निकले हैं.

उल्लास हैं,खुशी हैं,जश्न हैं
लेकिन शुक्रिया उनका,
सलाम उनको
जिनके हौसले लड़ते रहें
हर घड़ी , हर क्षण
हमारी सांस के लिए.
आज उन्ही की देन हैं
कि हम उसी मस्ती
और उसी उमंग से निकले हैं.

शुक्रिया धामी,
आपके हौसले का 
जो हमारी मुश्किलों में काम आए 
नही तो यही सुरंग 
हमारी कब्रगाह होती
लेकिन नही
हम जीत गए और मौत हार गई.

हे!उत्तरकाशी 
शायद !
तेरे कण–कण को प्रणाम,
करने की खातिर
हम सारे मजदूर 
मौत की सुरंग से निकले हैं.

✍️✍️आखिर ज़िंदगी जीत गई🌹🌹

रचना--रंगनाथ द्विवेदी
जिला--जौनपुर (U P)

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