चोर-चोर कहते हुए कुछ लोग एक छोटे से मैले-कुचैले नीक़्कर पहने लड़के को दौड़ाए हुए थे, और वह लड़का बेतहाशा भाग रहा था तभी सामने से आती हुई एक तेज रफ्तार कार से उस बेतहाशा भागते हुए चोर लड़के का एक्सीडेंट हो गया.
इस एक्सीडेंट के होते ही उस कार के ड्राइवर ने घबराहट में अपनी कार को और रफ्तार देदी जिसकी वजह से एक बार फिर उसकी कार उस चोर लड़के के ऊपर चढ़ गई और ड्राइवर अपनी कार के साथ भाग खड़ा हुआ. उस लड़के के पीछे चोर-चोर कह कर जो लोग दौड़ाए हुए थे उन्होंने भी जब इस हादसे को होता हुआ देखा तो जैसे उन सभी के पाँवो को सांप सुंघ गया हो वे सभी थमकर रुक गए और उनके चोर-चोर कहने वाले होंठ तो जैसे काठ के हो गए हो सभी सर झुकाए उस चोर लड़के की लाश को बड़ी ही आत्मग्लानि से देख रहे थे.
और इतना ही बल्कि इस घटना के तुरंत बाद ही वहां देखते ही देखते एक अच्छी खासी भीड़ इकट्ठी हो गई, और मैं भी उस लड़के को तब से देख रहा था जब से उसे चोर-चोर कह कर कुछ लोग दौड़ाए हुए थे, अतः मैं भी उस भीड़ में जाकर यह देखना चाहता था कि आखिर उस लड़के ने ऐसी क्या चीज चुराई हुई थी जिसकी वजह से, आज उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.
जब मैं उस लड़के की लाश के पास पहुंचा तो मैंने देखा कि, एक अखबार में लिपटी हुई कुछ रोटियां उस लड़के की लाश के इधर-उधर बिखरी हुई पड़ी थी, मैं समझ गया कि क्यों बाजार के कुछ लोगों ने इस लड़के को पकड़ने के लिए दौड़ाया हुआ था, क्योंकि इस लड़के ने अपने पेट को भरने के लिए एक बहुत बड़ी चोरी की थी " रोटियों की चोरी ".
यह लघुकथा मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है.
लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P )
mo. no.7800824758
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