(केदारनाथ सिंह-एक श्रद्धांजलि)
केदारनाथ------------
के साहित्य से यहां की मिट्टी बोलती थी,
शब्द-दर-शब्द का खाटीपन था,
पन्ने-दर-पन्ने उनकी किताबभर नही,
दोस्तो को लिखि उस दौर की-------
उनकी हर चिट्ठी बोलती थी।
लेकिन एक-एककर सब जाते गये,
और टुटता गया ये सिलसिला,
गाँव की उबड़-खाबड़ सड़के,
और उनके साथियो की तरह बिछड़े,
किनारे पड़े छिटके आँख नम किये-------
उस सड़क के यादो की गिट्टी बोलती थी।
लेकिन आज वे भी चले गये,
उनके जाने का रुंधापन और नम आँखे,
कह रही कि---------
उनके साहित्य का ये रितापन,
शायद फिर न भर सके।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर--222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758
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