Thursday, 14 November 2024

(सब कुछ था)

(खुदा ही सब कुछ था)

वे एक किरदार,वे एक बलंदी
वे एक मकाम
सब कुछ था,

वे एक शजर,
वे एक दरख़्त,एक शाख
एक परिंदा, एक दहर
सब कुछ था 

भागते,दौड़ते,थकते 
दौलत की जिंदगी गुजरी
और फिर एक दिन
सांस टूट गई
अपने समय के सिकंदर की 
तब लगा कि
कही कुछ नहीं,
बस खुदा ही
सब कुछ था.

✍️✍️ रंगनाथ द्विवेदी
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स्कूटर से लेकर प्लेन तक जिसने तमाम बुलंदियों को छुआ ऐसी महान शख्सियत सुब्रत राय सहारा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि✍️✍️💐💐🙏🙏

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