अंग्रेजी कहानी में जो स्थान ब्रेट हार्ट,हिंदी में मुंशी प्रेमचंद का हैं वही स्थान व्यंग्य साहित्य के लेखन में हरिशंकर परसाई का है,जिनके बारे में हम कह सकते हैं कि ऐसा व्यंग्य लेखक "ना तो भूतों ना तो भविष्यति" कोई होगा लेकिन ऐसा भी नहीं इनके बाद व्यंग्य की धरती बंजर हो गई उत्कृष्ट व्यंग्य लेखन अब भी हो रहा हैं,,,, लेकिन हा ऐसे समय में जब हिंदी की तमाम बड़ी पत्रिकाएं अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हों ऐसे समय में "व्यंग्य यात्रा" व्यंग्य के पाठकों की पहली पसंद बना हुआ है तो इसमें व्यंग्य के वर्तमान शिखर पुरुष प्रेम जनमेजय सर का बहुत बड़ा योगदान है.
"व्यंग्य यात्रा" केवल एक व्यंग्य पत्रिका ही नहीं बल्कि व्यंग्य कि एक पूरी क्लासिक यात्रा भी हैं", ऐसे में इस बार का अंक "हरिशंकर परसाई" पर रखकर प्रेम जनमेजय सर ने इस अंक को एक कालजई रूप दिया है, आज की डाक से मुझे सिर्फ इसकी एक पाठकीय प्रति ही नहीं बल्कि मुझे ऐसा लग रहा कि जैसे मैं भी व्यंग्य के इस नालंदा विश्वविद्यालय में हरिशंकर परसाई सर के लिखें हुए व्यंग्य की विधिवत क्लास देश के श्रेष्ठ और उत्कृष्ट व्यंग्य के गुणी आचार्यों से ले रहा हूं,,,,,,, एक बार पुनः मुझे अपना प्यार स्नेह और आशीर्वाद देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और सादर प्रणाम सर ✍️✍️🙏🙏
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