Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 19 November 2024
(तबस्सुम चली गई)
(तब्बसुम चली गई)
तुम्हें विदा करे उर्दू
या फिर विदा करे हिंदी
लेकिन---
तेरे जाने से
तहज़ीब के होठों से
"तब्बसुम" चली गई 😥😥😥
रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जनपद--जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
"अलविदा तब्बसुम"💐💐💐
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