Rangnath Dubey's Poems
Friday, 1 November 2024
(मदिरा की गली में)
(मदिरा की गली मे)
हमने देखा है,ये प्रेम बस-------
मदिरा की गली मे।
कि राम चुस्कियाँ लेते है,
भूल कौम,मज़हब---------
और खुद डालते है मदिरा,
गिलास-ए-अली मे।
ऐ,रंग----हमने देखा है,ये प्रेम बस----
मदिरा की गली मे।
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